maharashtraprimenews
ठळक बातम्या
Breaking newsgeneralPublic Interest

खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं वहनीय विकास से जुड़े नवोन्मेष के लिए

मुंबई, 20 नवंबर 2025: न्यूयॉर्क अकैडमी ऑफ साइंसेज़ और टाटा संस ने आज 2025 टाटा ट्रांसफॉर्मेशन पुरस्कार के विजेताओं की घोषणा की है। इस पुरस्कार से तीन असाधारण भारतीय वैज्ञानिकों को सम्मानित किया गया है, जिनके नवोन्मेष खाद्य सुरक्षा, वहनीयता और स्वास्थ्य सेवा से जुड़ी महत्वपूर्ण चुनौतियों का समाधान करते हैं। 27 राज्यों के 212 नामांकनों में से चुने गए इन विजेताओं का चयन एक अंतरराष्ट्रीय निर्णायक मंडल ने किया जिसमें प्रमुख विशेषज्ञ शामिल रहे। चुने गए हर वैज्ञानिक को अपने शोध को आगे बढ़ाने के लिए 2 करोड़ रुपये मिलेंगे। पुरस्कार समारोह अगले महीने, दिसंबर में मुंबई में आयोजित किया जाएगा।

एन.चंद्रशेखरन, अध्यक्ष,टाटा संस ने कहा,”इस साल के विजेताओं की वैज्ञानिक उपलब्धियां-जलवायु रोधी फसल का विकास, वहनीय जैव-विनिर्माण और कम दुष्प्रभाव वाले कैंसर का इलाज – कई साल के समर्पण और बलिदान का परिणाम हैं। उनका शोध भारत और समग्र मानवता के लिए महत्वपूर्ण है। टाटा समूह का लंबे समय से मानना रहा है कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी व्यापक मानव प्रगति का मार्ग प्रशस्त करते हैं, ऐसे में हमें इस साल के विजेताओं के उत्कृष्ट प्रयासों में सहयोग देने पर गर्व है।”

खाद्य सुरक्षा:नेशनल सेंटर फॉर बायोलॉजिकल साइंसेज़ से पीएचडी करने वाले, पदुबिद्री वी. शिवप्रसाद ने एपिजेनेटिक इंजीनियरिंग और आरएनए-आधारित मामूली संशोधन कर जलवायु-रोधी चावल विकसित किया है। उनके द्वारा विकसित यह चावल जलवायु संबंधी किसी तरह के बदलाव को झेल सकता और पोषण के मूल्य को बढ़ाता है, उर्वरकों और कीटनाशकों पर निर्भरता कम करता है, और भारत की तेज़ी से बढ़ती आबादी को भोजन उपलब्ध कराने के लिए व्यापक समाधान प्रदान करता है।

वहनीयता: इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ साइंस से पीएचडी करने वाले, बालसुब्रमण्यम गोपाल ने एक अत्याधुनिक हरित रसायन मंच तैयार किया है जो इंजीनियर्ड ई. कोलाई और एआई-संचालित एंज़ाइम डिज़ाइन का उपयोग कर फार्मास्यूटिकल्स, सौंदर्य प्रसाधनों और कृषि के लिए महत्वपूर्ण रसायनों का वहनीय उत्पादन करता है। उनके दृष्टिकोण से प्रदूषण होता है, उत्पादन लागत में कमी होती है, और वैश्विक जैव-विनिर्माण (बायोमैन्युफैक्चरिंग) में भारत की स्थिति मज़बूत होती है।

स्वास्थ्य सेवा: इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ साइंस से पीएचडी करने वाले, अंबरीश घोष, ऐसे चुंबकीय (मैग्नेटिक) नैनोरोबोट विकसित कर रहे हैं जो मानव शरीर में घूमकर सीधे ट्यूमर तक दवा पहुंचा सकते हैं। ये बेहद छोटे, सर्पिल (हेलिकल) उपकरण कैंसर का अपेक्षाकृत अधिक सटीक, कम चीर-फाड़ वाला उपचार कर सकते हैं जिसका दुष्प्रभाव काफी कम होगा। इस तरह कैंसर के सुलभ और बेहतर उपचार की नई उम्मीद जगी है।

Related posts

एचडीएफसी लाइफने ९९.५० टक्‍के क्‍लेम सेटलमेंट रेशिओ संपादित केला आणि आर्थिक वर्ष २४ साठी क्‍लेम्‍समध्‍ये १,५८४ कोटी रूपये देय दिले

Shivani Shetty

क्रेडाई-एमसीएचआयने आपल्या चॅनेल भागीदारांसाठी आयोजित केलेल्या पहिल्या-वहिल्या विशेष ‘प्रॉपर्टी एक्स्पो’मध्ये MMR क्षेत्रातील ६०% रिअल इस्टेट विक्रीचे मुख्य चालक म्हणून या भागीदारांचा गौरव!

Shivani Shetty

व्हिएतजेटकडून भारतातील नेटवर्कमध्‍ये वाढ; अहमदाबाद ते दा नांगपर्यंत नवीन विमानमार्ग लाँच

Shivani Shetty

Leave a Comment